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अपने मरने की खबर पर मुनव्वर राना बोले - 'मैं अभी जिंदा हूं'

अपने मरने की खबर  पर मुनव्वर राना बोले - 'मैं अभी जिंदा हूं                             

'तेरी यादों ने बख़्शी है हमें ये जिंदगी, वरना बहुत पहले ही हम क़िस्सा-कहानी हो गये होते!
ये शेर है उर्दू के मकबूल शायर मुनव्वर राना का. पर उन्हें याद करने वालों के बीच सोशल मीडिया पर खबर फैल गयी कि मुनव्वर राना अब नहीं रहे. उनके चाहने वालों ने दिन भर उन्हें याद किया. जरिया बनी उनकी शेर-ओ-शायरी. पर कुछ ही घंटों के बाद खबर पलट गई. लोगों को पता चल गया कि वो जिंदा है, मजफूज हैं और सेहतमंद हैं. और इस खबर की ताकीद की खुद मुनव्वर राना ने. उन्होंने कहा-“अभी मैं जिंदा हूँ”                                                                                                                             
 क्या हुआ वायरल?
6 फरवरी की सुबह से सोशल मीडिया पर मुनव्वर राना साहब के इंतकाल पर शोक जताने वाली पोस्ट आने लगीं. और कुछ ही समय में खबर इतनी फैल गयी कि गूगल पर ‘मुनव्वर राना’ सर्च करने पर ‘मुनव्वर राना डेथ’ सजेशन में आने लगा.
                                                                        क्या है असलियत?

दरअसल, 4 फरवरी को मुनव्वर साहब की तबीयत खराब हुई. अचानक सीने में दर्द उठा और वो बेहोश हो गए. उन्हें लखनऊ के एसजीपीजीआई अस्पताल में भर्ती करवाया गया. सुबह लाइफ सपोर्ट पर रखा गया पर शाम तक वेंटीलेटर से हटा लिया गया और उन्हें आईसीयू में ही रखा गया. उनकी मौत की अफ़वाह उड़ने के बाद बुधवार को उन्होंने दोपहर में ट्वीट किया-
आप सभी चाहने वालों की मोहब्बत और दुआओं की बदौलत हमारी सेहत में सुधार है. अभी अफ़सोस करने की ज़रुरत नहीं है.. मैं जिंदा हूँ. मज़ीद दुआओं कि दरख़्वास्त. फ़कीर – मुनव्वर राना
                                                             शाम को एक विडियो में फिर से अपने जिंदा होने की पुष्टि की और शेर फ़रमाया –

“मुझे अपनी पज़ीराई से डर लगता है. इतनी शोहरत हो तो रुसवाई से डर लगता है.”
कौन हैं मुनव्वर राना?
वैसे तो उनके चाहने वालों के लिए ये सवाल गैर वाजिब लग सकता है. लेकिन फिर भी. अगर नाम न सुना हो तो ये शेर तो सुना ही होगा.
“किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई
मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में मां आई”
ये लाइनें मुनव्वर राना हैं. उन्होंने मां पर ऐसी शायरी रची कि मां सुनते ही लोगों से ज़हन में मुनव्वर राना और उनके शेर आते हैं. उन्होंने कहा था
मामूली एक कलम से कहां तक घसीट लाए
हम इस ग़ज़ल को कोठे से मां तक घसीट लाए
एक और बात. मुनव्वर साहब का नाम ‘मुनव्वर राना’ है ‘मुनव्वर राणा’ नहीं. उन्होंने खुद भी कई बार ये क्लियर किया है. उनका जन्म 26 नवम्बर 1952 को रायबरेली, उत्तरप्रदेश में हुआ. पढ़ाई-लिखाई कलकत्ता से की. मां पर शायरी लिखी. शायरी तो और भी लिखी, लेकिन मां पर इतना लिखा कि मां की शायरी और मुनव्वर एक दूसरे के पर्याय बन गए. मुनव्वर ने ग़ज़ल गांव, पीपल छांव, नीम के फूल जैसी रचनायें कीं और 2014 में उन्हें उर्दू लिटरेचर के लिए साहित्य अकादमी पुरुस्कार से भी नवाज़ा गया. इसमें भी एक उलटबांसी है. और वो ये कि जिस शायरी ने मुनव्वर राना को इस मुकाम तक पहुंचाया, उन्हें उसमें पुरस्कार नहीं मिला. उन्हें पुरस्कार मिला गद्य में किताब शहदाबा के लिए.
मुनव्वर साहब अब स्वस्थ हैं. यहीं हैं. जैसा उन्होंने खुद ही लिखा है-
यहीं रहूंगा कहीं उम्र भर न जाऊंगा
ज़मीन मां है इसे छोड़ कर न जाऊंगा
हमारी दुआ है कि मुनव्वर साहब सेहतमंद रहें और अपनी शेर-ओ-शायरी से हमें नवाजते रहें. ख़ुदा उन्हें लम्बी उम्र अता करे.
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Milan Tomic

Hi. I’m Designer of Blog Magic. I’m CEO/Founder of ThemeXpose. I’m Creative Art Director, Web Designer, UI/UX Designer, Interaction Designer, Industrial Designer, Web Developer, Business Enthusiast, StartUp Enthusiast, Speaker, Writer and Photographer. Inspired to make things looks better.

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