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प्रिजनर ऑफ वॉर स्टेटस क्या है, जिससे पायलट अभिनंदन के सुरक्षित लौटने की उम्मीद है?

प्रिजनर ऑफ वॉर स्टेटस क्या है, जिससे पायलट अभिनंदन के सुरक्षित लौटने की उम्मीद है?

भारत-पाकिस्तान की बढ़ती टेंशन के बीच भारत के लिए एक बुरी खबर आई. विंग कमांडर अभिनंदन के पाकिस्तानी सेना के कब्जे में होने की. सरकार ने भी माना है कि हमारा एक मिग 21 विमान का पायलट मिसिंग है. अभिनंदन से जुड़े काफी सारे वीडियोज भी सोशल मीडिया में वायरल हैं. मगर देश की चिंता इस वक्त यही है कि अभिनंदन सुरक्षित वापस भारत आ जाएं. दावा किया जा रहा है कि अभिनंदन सुरक्षित रहेंगे. क्योंकि पाकिस्तान उन्हें प्रिजनर ऑफ वॉर की तरह ट्रीट करेगा. प्रिजनर ऑफ वॉर होने से क्या सहूलियत मिलेगी. ये टर्म क्या है. आपको समझाते हैं.

दरअसल प्रिजनर ऑफ वॉर को कुछ खास छूट और सहूलियतें मिलती हैं. उसे आम दुश्मन की तरह नहीं ट्रीट किया जाता. प्रताड़ित नहीं किया जाता. इसके लिए पहली बार गाइडलाइंस बनी थीं 1929 में हुए जेनेवा कन्वेंशन में. फिर 1949 में हुए तीसरे जेनेवा कन्वेंशन में इसको रिवाइज किया गया था. द्वितीय विश्व युद्ध में हुई गल्तियों से सीखते हुए. हालांकि ये प्रिजनर ऑफ वॉर का स्टेटस सबको नहीं मिलता. ये सिर्फ उन 174 राष्ट्रों पर लागू होता है, जिन्होंने 1977 में हुए फर्स्ट ऐडिशनल प्रोटोकॉल को माना था.                                                                                                                                     क्या होता है प्रिजनर ऑफ वॉर?

प्रिजनर ऑफ वॉर यानि युद्धबन्दी उस व्यक्ति को कहते हैं जो किसी सशस्त्र संघर्ष के दौरान या तुरन्त बाद दुश्मन देश द्वारा हिरासत में ले लिया गया हो. ये एक तरह का स्टेटस है, जो सिर्फ किसी इंटरनैशनल सशस्त्र युद्ध में लागू होता है जिसमें एक, दो या ज्यादा देश शामिल हों. ये उस तरह के युद्ध में लागू नहीं होता जैसे अमेरिका ने ईराक में हमला किया था.

क्या होते हैं प्रिजनर ऑफ वॉर के अधिकार –

– प्रिजनर ऑफ वॉर के साथ उसके सम्मान का खयाल करते हुए व्यवहार किया जाता है.

– बंदी बनने की खबर परिवार वालों तक पहुंचाई जाती है. साथ ही इंटरनैशनल कमेटी ऑफ रेड क्रॉस को जानकारी दी जाती है.

– बंदी को रिश्तेदारों से बात करने की परमिशन होती है. घर से आया सामान भी उस तक पहुंच जाता है.

– बंदी के खाने, पीने, कपड़े, से लेकर ठहरने और मेडिकल की पूरी व्यवस्था की जाती है.

– जो काम बंदी करेगा उसकी उसे तनख्वाह मिलेगी. साथ ही उससे ऐसा कोई काम नहीं करवाया जाएगा जिसमें किसी तरह के जान-माल का खतरा हो.

– युद्ध के तुरंत बाद उसे छोड़ा जाएगा.

– बंदी पर नाम, उम्र, रैंक और सर्विस नंबर के अलावा कुछ और बताने का दबाव नहीं बनाया जा सकता है.

– इसके अलावा अगर युद्ध के दौरान बंदी धायल या बीमार मिलता है तो उसे इंटरनैशनल कमेटी ऑफ रेड क्रॉस मदद पहुंचाती है.

अभी तक पाक की मीडिया रिपोर्ट्स में अभिनंदन के जो वीडियो आए हैं. उनमें भी अभिनंदन को प्रिजनर ऑफ वॉर की तरह ही ट्रीट करता दिखाया जा रहा है. वो चाय पीते दिख रहे हैं. अपनी सलामती की बात कह रहे हैं. इसी तरह पहले आए एक वीडियो में अभिनंदन से जब जानकारी मांगी गईं तो उन्होंने सिर्फ नाम, उम्र, रैंक और सर्विस नंबर ही बताया. और पूछने पर उन्होंने बताने से इनकार कर दिया. इसके बाद पाक सेना उन्हें फोर्स करती नहीं दिखी. जैसा कि प्रिजनर ऑफ वॉर के साथ करना चाहिए. पर ये सब अभी दावे हैं. जब तक अभिनंदन वापस न आ जाएं, कुछ साफ नहीं कहा जा सकता.
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Milan Tomic

Hi. I’m Designer of Blog Magic. I’m CEO/Founder of ThemeXpose. I’m Creative Art Director, Web Designer, UI/UX Designer, Interaction Designer, Industrial Designer, Web Developer, Business Enthusiast, StartUp Enthusiast, Speaker, Writer and Photographer. Inspired to make things looks better.

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