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Chanakya in Hindi – कोन थे आचार्य चाणक्य, चाणक्य की जीवन गाथा                                 
                                                           दोस्तों आज इस आर्टिकल में,  मै  गौरव सिंह राजपूत, आपको Chanakya in hindi के बारे में बताने जा रहा हूँ. आज मै आपको बताऊंगा की आचार्य चाणक्य कोन थे और आचार्य चाणक्य की नीति क्या-क्या थी.

वैसे आपको तो पता ही है की चाणक्य की मौत हो चुकी है आचार्य चाणक्य के नीति वाक्य आज भी अमर है. आपने यह बात तो सुनी होगी की कोई भी इंसान अपने नाम से नही बल्कि अपने काम से बड़ा बनता है. तो इस बात को हम chanakya के उपर बोल सकते है.
पर फिर भी
दोस्तों अब मै आपको Biography of chanakya in hindi बताने जा रहा हूँ. तो आईये पढना शुरू करते है.चाणक्य आचार्य राधाकृष्ण स्वामी को बेसुध अवस्था में खेतों में पड़े मिले थे | स्वामीजी उस बालक को होश में लाए और उसका परिचय पूछा.
मैं एक अनाथ बालक हूँ, आचार्यजी | संसार में मेरा कोई नहीं है | कभी यहाँ, तो कभी वहाँ भटकता फिर रहा हूँ|” होश में आने पर चाराक्य ने कहा.
जो अनाथ होता है, उसका नाथ ईशवर होता है|” तुम स्वयं को अनाथ मत समझो | ईशवर को अपना बनाओ, वह बहुत दयालु है.”
चाणक्य बोले : मुझे इस समय आप में ही ईशवर के दर्शन हो रहे हैं. आपने इतने अपनत्व से बात की तो मेरे मन का सारा भ्रम दूर हो गया.”
राधाकृष्ण : तो फिर उठो और मेरे साथ चलो.”
चाणक्य : कहाँ आचार्यजी ?
राधाकृष्ण : पाठशाला, वहाँ चलकर विश्राम करो और जब पूरी तरह स्वस्थ हो जाओ तो जहाँ इच्छा हो, वहाँ चले जाना.”
आप पूजनीय हैं, आदरणीय हैं| मैं आपकी आज्ञा अवश्य मानूँगा|” कहकर चाणक्य उठ खड़ा हुआ और आचार्य के साथ चल पड़ा.
विष्णुगुप्त !” चाणक्य ने उन्हें एक काल्पनिक नाम दिया| स्वामीजी चाणक्य को लेकर पाठशाला की और चल दिए.
राधामोहन स्वामीजी ने चाणक्य का उपचार किया. इससे कुछ ही दिनों में चाणक्य स्वस्थ हो गया. इसके पशचात वह कही नही गया. वहीं रहकर स्वामीजी की सेवा करने लगा.
एक दिन स्वामीजी अपने शिष्यों को पढ़ा रहे थे. पढ़ाते-पढ़ाते एक स्थान पर उनसे छोटी सी भूल हो गई. चाणक्य पास ही बैठे थे. अचानक उनके मुहँ से निकला, “आचार्यजी! आप भूल कर गए| यहाँ ऐसे नहीं है, ऐसे है.”
स्वामीजी ने चोंककर चाणक्य की ओर देखा और पूछा, “तुम्हें कैसे पता? भूल तो मुझसे वास्तव में हुई है, परन्तु क्या तुम्हें यह सब आता है?
“आप है आचार्यजी!” चाणक्य ने उतर दिया, “एक कृपालु आचार्यजी ने मुझे थोडा-बहुत पढ़ाया था, वह मुझे अभी तक याद है.”
आचार्य ने चाणक्य की प्रतिभा को पहचान लिया था| अब उन्होंने चाणक्य को शिक्षा प्रदान करने का निशचय किया.
चाणक्य आदर्श शिष्य के समान स्वामीजी से शिक्षा ग्रहण करने लगा.
स्वामीजी की पाठशाला में चाणक्य की योग्यता ने स्वामीजी की बहुत प्रभावित किया. अपने नए शिष्य में स्वामीजी को अनूठी प्रतिभा के दर्शन हुए. ऐसा शिष्य पहले कभी उनके जीवन में नहीं आया था. उन्होंने निश्चय कर लिया कि अपने उस शिष्य को सफल करके ही दम लेंगे.
अल्प समय में ही चाणक्य ने अपने गुरु तथा सहपाठियों के दिल जीत लिये. सभी उनके बुद्धि-चातुर्य की प्रशसा करने लगे. जो बात दूसरे छात्र बार-बार रटने से भी याद न कर पाते, बालक चाणक्य उसे एक बार सुनकर ही कठस्थ कर लिया करता था.स्वामीजी ने चाणक्य की प्रतिभा को देखते हुए उसे अध्याय के लिए तक्षशिला भेजने का निशचय किया और चाणक्य से बोले, “मैं चाहता हूँ की अब तुम तक्षशिला आओ. वहाँ विशवविधालय में जाकर अपनी प्रतिभा का प्रदशन करो.
जीवन में वह स्थान प्राप्त करो, जो आज तक कोई प्राप्त नही कर सका. बस यही मेरी गुरु-दक्षिणा है.
“मैं आपको यह गुरु-दक्षिणा दूंगा गुरुदेव!” चाणक्य उत्साहित होकर बोले, “आज से यही मेरा ध्येय होगा और यही मेरी तपस्या.”
स्वामीजी ने चाणक्य से तक्षशिला में जाकर आचार्य पुण्डरीकाक्ष से मिलने की सलाह दी और उनके लिए एक पत्र भी दिया. चाणक्य ने उनकी सलाह को मान लिया और आपनी शिष्या वहा पर ग्रहण करने लगे.chanakya in hindi का यह आर्टिकल यही पर फिनिश हुआ. आज हम उनको आचार्य चाणक्य के रूप मैं मानते है वैसे तो चाणक्य की मृत्यु हो चुकी है परन्तु चाणक्य के अनमोल विचार आज भी हमारे बीच जीवित है.
आपसे बस एक ही इल्तिजा है की आपको chanakya को थैंक्स जरुर बोलना चाहिए. आप कमेंट करके इनको थैंक्स बोल सकते हो और इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शेयर भी कर सकते हो. 🙂
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Milan Tomic

Hi. I’m Designer of Blog Magic. I’m CEO/Founder of ThemeXpose. I’m Creative Art Director, Web Designer, UI/UX Designer, Interaction Designer, Industrial Designer, Web Developer, Business Enthusiast, StartUp Enthusiast, Speaker, Writer and Photographer. Inspired to make things looks better.

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